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MASLAK e ALA HAZRAT ZINDABAD
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جمادی الاول (جمادی الاولیٰ)

जमादिउल अव्वल (जमादिउल ऊला)

Jamadi-ul-Awwal (Jamadi-ul-Ula) · Mahina 5 / 12
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पांचवां महीना — जमादिउल अव्वल (जमादिउल ऊला)

इस्लामी पांचवीं महीना का नाम जमादिउल अव्वल (जमादिउल ऊला) है। वजह तसमियह उसकी यह कि इस का नाम रखने के वक्त ऐसा मौसम था कि जिसमें पानी जम जाता था। इस महीने की आठवीं तारीख में हज़रत मौला इब्ने अबी तालिब करमल्लाहो वज्हुल करीम पैदा हुये थे और इसी माह की पंद्रहवीं तारीख को वाकया जमल पेश आया था।

सय्यदना हज़रत अली मुरतज़ा रज़ी अल्लाह तआला अन्हो की विलादत पाक के मुख्तसर हालात

नाम निस्ब खानदान आपका नाम मुबारक हज़रत अली रज़ी अल्लाह तआला अन्हो अबुलहसन और अबु तुराब कुनियत हैदर शेर लकब वालिद अबु तालिब और वालदा का नाम फातिमा था पूरा सिलसिला नस्ब यह है।

अली इब्ने तालिब बिन अब्दुल मुत्तलिब इब्ने हाशिम इब्ने अबद मनाफ बिन कसी बिन कलाब इब्ने मर्रह इब्ने कआब इब्ने लुई

चूँकि अबु तालिब की शादी अपने चचा की लड़की से हुई थी इस लिये सय्यदना हज़रत अली करमल्लाहो वज्हुल करीम नजीबुल तरफैन हाशमी और महबूब किबरिया सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम के चचाज़ाद भाई थे। सय्यदना हज़रत मौला अली रज़ी अल्लाह अन्हो के वालिद अबु तालिब मक्का मुकर्रमा के निहायत ज़ी असर बुज़ुर्ग थे सय्यद दो आलम सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम ने उन्हीं की आगोश शफकत में परवरिश पाई थी और बेअसत के बाद उन्हीं के ज़ेर हिमायत मक्का मुअज़्ज़मा के कुफ्फिस्तान में दावत हक का ऐलान किया था। अबु तालिब अगरचे खुद ईमान नहीं लाये थे मगर मौका पर आपके लिये सीना सिपर रहे। और हबीब खुदा सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम को कुफ्फार के पन्जाए ज़ुल्म से महफूज़ रखने की कोशिश करते रहे।

और सय्यदना हज़रत अली करमल्लाहो वज्हुल करीम की वालदा माजदा हज़रत फातमा ने भी हज़रत आमना खातून रज़ी अल्लाहो तआला अन्हा के इस यतीम मासूम की माँ की तरह शफकत से परवरिश की।

मुस्तनद रवायात के मुताबिक वह मुसलमान हुयीं और हिजरत करके मदीना मुनव्वरा तशरीफ ले गयीं। जब उनका इन्तेकाल हुआ तो रहमतुल लिलआलमीन सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम ने कफन में अपनी कमीज़ मुबारक पहनाई और कब्र में लेटकर उसको मुतबर्रक किया। लोगों ने उस एनायत की वजह दरयाफ्त की तो फरमाया कि अबु तालिब के बाद मैं सबसे ज़्यादा उस नेक सीरत खातून का ममनून एहसान हूँ।

विलादत पाक हज़रत अली रज़ी अल्लाहो तआला अन्हो

सय्यदना हज़रत अली करमल्लाहो तआला वज्हुल करीम की वालदा माजदा सैयदा हज़रत फातमा बिन्ते असद रज़ी अल्लाह तआला अन्हा फरमाती हैं कि हज़रत अली रज़ी अल्लाह तआला अन्हो मेरे शिकम में थे ज़माना जाहिलियत का था। मैं हुबल बुत को सजदा करने का इरादा करती तो मेरा बच्चा मेरे पेट में पेच व ताब खाने लगता जिसकी वजह से मैं बुत को सजदा न कर सकती।

आपकी विलादत पाक काबा शरीफ में हुई इसमें एखतेलाफ है कि कौनसा महीना था। बाज हज़रात ने रजब का महीना बयान किया है।

और बाज ने जमादिउल अव्वल (जमादिउल ऊला) का ज़िक्र किया है।

विलादत पाक के बाद सैयदुल अम्बियाए वल मुरसलीन सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम तशरीफ ले गये और आपका नाम हुज़ूर अक़दस ने खुद अली रखा (रज़ी अल्लाहो अन्हो) और अपना लोआब दहन मुबारक उनके मुंह में डाला और फिर अपनी मुबारक ज़बान उनको चटाते रहे, यहांतक कि हज़रत अली रज़ी अल्लाहो तआला अन्हो सो गये।

आपकी वालदा हज़रत फातमा बिन्ते असद रज़ी अल्लाहो तआला अन्हा फरमाती हैं कि विलादत के दूसरे रोज़ आपको दूध पिलाने के लिये एक दाई मोकर्र की मगर नौमौलूद बच्चा (अली करमल्लाहो तआला वज्हुल करीम) ने दाया की तरफ कोई इल्तिफात न की और न ही इसका पिस्तान मुंह में लिया।

उसकी वजह ज़ाहिर है कि हज़रत अली करमल्लाहुल करीम को जो लुत्फ और शीरीनी अल्लाह तंआला के हबीब पाक साहब लौलाक सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम के लोआबे दहन में आती थी भला उस दाई के दूध में कहां थी। चुनांचे रहमतुल लिलआलमीन सैयदुल आलमीन सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम को घर में बुलाया गया। आपने अपनी ज़बान मुबारक चटोनी शुरू की तो हज़रत अली रज़ी अल्लाहो तआला अन्हो सेर होकर सो गये। और काफी अर्सा तक यही मामूल रहा।

जमादिउल अव्वल (जमादिउल ऊला) की नफिल इस महीना की पहली तारीख की रात में चार रिकअत नमाज़ पढ़े हर रिकअत में ग्यारह मरतबा कुलहुअल्लाहो अहद पढ़े तो अल्लाह तआला नव्वे हज़ार साल नेकियां उसके नामए आमाल में लिखने का हुक्म देता है। और नव्वे हज़ार साल की बुराइयां उसके नामए आमाल से दूर करता है।