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MASLAK e ALA HAZRAT ZINDABAD

ग्यारहवां महीना — ज़िलक़ादा

इस महीना में अहले अरब जदाल व कताल को छोड़कर इतमेनान व आराम के साथ अपने घरों में बैठ जाते थे। इस महीना में उनका कहना था कि लड़ाई झगड़े से बाज रह कर चुप चाप घर में बैठे रहो इसी मुनासबत से इस महीना का नाम जीकादा रखा गया।

माहे ज़िलक़ादा वाकयात की रोशनी में : ज़िलक़ादा का महीना वह बुज़ुर्ग महीना है जिसको हुर्मत का महीना फरमाया गया है। अल्लाह तबारक व तआला ने फरमाया यानि बारह महीनों में चार महीने हुर्मत वाले हैं उनमें से पहला हुर्मत वाला महीना ज़िलक़ादा है। उसमें मुन्दर्जा ज़ैल वाकआत रूनुमा हुये।

सैयदना हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम का तीस रातों का वादा

जीलकादा की पहली तारीख को जल्ल शानुहू ने सैयदना हज़रत मूसा अला नबीयना अलैहिस्सलातो वस्सलाम को किताब देने के लिये तीस रातों का वादा फरमाया था। इरशाद बारी तआला है।

और हमने मूसा अलैहिस्सलातो वस्सलाम से तीस रातों का वादा फरमाया और उनमें दस और बढ़ा कर पूरी कीं तो इस के रब का वादा पूरी चालिस रात का हुआ और हज़रत मूसा अलैहिस्सलातो वस्सलाम ने अपने भाई हज़रत हारून अला नबीयना अलैहिस्सलातो वस्सलाम से कहा कि मेरी कौम पर मेरे नायब रहना और इसलाह करना और फसादियों की राह को दखल ना देना और जब हज़रत मूसा अला नबीयना अलैहिस्सलातो वस्सलाम हमारे वादे पर हाज़िर हुआ। तो उसके रब ने कलाम फरमाया।

सैयदना मूसा अला नबीयना अलैहिस्सलातो वस्सलाम का बनी इसराईल से वादा था कि जब अल्लाह तआला उनके दुशमन फिरऔन को हलाक फरमा दे तो वह उनके पास अल्लाह तआला की जानिब से एक किताब लायेंगे जिनमें हलाल व हराम का बयान होगा।

जब अल्लाह तआला ने फिरऔन को हलाक किया तो सैयदना हज़रत मूसा अला नबीयना अलैहिस्सलातो वस्सलाम ने अपने रब से उस किताब के नाज़िल फरमाने की दरख्वास्त की। तो हुक्म हुआ कि तीस रोज़े रखें जब आप वह रोज़े पूरे कर चुकें तो अपने आप को दहन मुबारक में इस तरह की बू मालूम हुई कि जैसे आपने मिस्वाक की।

मलायका ने अर्ज़ किया कि हमें आपके दहन मुबारक से बड़ी महबूबियत खुशबू आया करती थी आपने मिस्वाक करके उसको खत्म कर दिया।

अल्लाह तआला ने फरमाया कि माहे जीलहिज्जा में दस रोज़े और रखें। और फरमाया कि ऐ मूसा! नबीयना अलैहिस्सलातो वस्सलाम क्या तुम्हें मालूम नहीं कि रोज़ेदार की मुंह की खुशबू मेरे नज़दीक खुशबू मुश्क से ज़्यादा अज़ीज़ है।

खुलासा यह कि जब सैयदना हज़रत मूसा अला नबीयना अलैहिस्सलातों वस्सलाम कलाम सुनने के लिये हाज़िर हुये तो आपने तहारत की और पाकीज़ा लिबास पहना और रोज़ा रखकर तूर सीना में हाज़िर हुये। अल्लाह तआला ने एक बादल नाज़िल फरमाया जिसने पहाड़ को हर तरफ से बढ़कर चार फरसंग ढांक लिया। शयातीन और ज़मीन के जानवर हत्ता कि रहने वाले फरिश्ते तक वहां से अलाहदा कर दिये गये। और आपके लिये आसमान खोल दिया गया। तो आपने मलायका को मुलाहज़ा फरमाया कि हवा में खड़े हैं और आप ने अर्शे इलाही को साफ देखा। यहां तक कि अर्वाह पर कलमों की आवाज़ सुनी और अल्लाह तबारक व तआला ने आपसे कलाम फरमाया आपने उसकी बारगाह में मारूज़ात पेश किये।

उसने अपना कलाम करीम सुनाकर नवाज़ा हज़रत जिबरील अलैहिस्सलातो वस्सलाम आप के साथ थे। लेकिन जो अल्लाह तआला ने सैयदना हज़रत मूसा अला नबीयना अलैहिस्सलातो वस्सलाम से फरमाया उन्होंने कुछ ना सुना।

फिर अल्लाह तआला ने सैयदना हज़रत मूसा अला नबीयना अलैहिस्सलातो वस्सलाम को तौरेत देकर फरमाया।

फरमाया ऐ मूसा! अलैहिस्सलाम मैं तुझे लोगों से चुन लिया अपनी रिसालतों और कलाम से तू ले जो मैंने तुझे अता फरमाया। और शुक्र वालों में हो। और हमने इसके लिये तख्तियों में लिख दी हर चीज़ की नसीहत और हर चीज़ की तफसील और फरमाया ऐ मूसा! अलैहिस्सलातो वस्सलाम, इसे मज़बूती से ले और अपनी कौम को हुक्म दे कि इसकी अच्छी बातें इख्तियार करें अनकरीब मैं तुम्हें दिखाऊंगा बेहुक्मों का घर।

खानए काबा की बुनियाद : इस महीना जीलकादा की पांचवीं तारीख को सैयदना हज़रत इब्राहीम खलीलुल्लाह अला नबीयना अलैहिस्सलातो वस्सलाम और सैयदना हज़रत इस्माईल ज़बीहुल्लाह अलैहिस्सलातो वस्सलाम ने बैतुल्लाह शरीफ की बुनियाद रखी थी। अल्लाह तआला फरमाता है।

जब उठाता था इब्राहीम अला नबीयना व अलैहिस्सलातो वस्सलाम उस घर की नेवें और इस्माईल अलैहिस्सलाम यह कहते हुये। ऐ रब हमारे हमसे तौबा क़ुबूल फरमा बेशक तू ही सुनता जानता। ऐ रब हमारे और कर हमें तेरे हुज़ूर गर्दन रखने वाला और हमारी औलाद में से एक उम्मत तेरी फरमाबरदार और हमें हमारी एबादत के कायदे बता और हमपर अपनी रहमत के साथ रुजू फरमा। बेशक तू ही है बहुत तौबा क़ुबूल करने वाला मेहरबान।

पहली मरतबा काबा मुअज़्ज़मा की बुनियाद सैयदना हज़रत आदम अला नबीयना अलैहिस्सलातो वस्सलाम ने रखी थी। और बाद तूफान नूह फिर सैयदना हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने उसी बुनियाद पर तामीर फरमाई। यह तामीर आपके दस्त अक़दस से हुई। और उसके लिये पत्थर उठाकर लाने की खिदमत और सआदत सैयदना हज़रत इस्माईल अलैहिस्सलातो वस्सलाम को मुयस्सर हुई। दोनों हज़रात ने उस वक्त यह दुआ की कि या रब हमारी यह ताअत व खिदमत क़ुबूल फरमा।

सैयदना हज़रत यूनुस अलैहिस्सलाम का मछली के पेट से निकलना

माहे जीलकादा की चौदहवीं तारीख में अल्लाह तबारक व तआला ने सैयदना हज़रत यूनुस अला नबीयना अलैहिस्सलातो वस्सलाम को मछली के पेट से निकाला था। इरशाद रब्बानी है।

बेशक यूनुस अलैहिस्सलाम पैगम्बरों से हैं। जब कि भरी कश्ती की तरफ निकल गया। तो कुरआ डाला तो धकेले हुवों में हुवा फिर उसे मछली ने निगल लिया और वह अपने आप को मलामत करता था। तो अगर वह तस्बीह करने वाला न होता तो ज़रूर उसके पेट में रहता जिस दिन तक लोग उठाये जायेंगे। फिर हमने उसे मैदान पर डाल दिया और वह बीमार था।

सैयदना हज़रत इब्ने अब्बास रज़ी अल्लाह तआला अन्हो और वहब का कौल है कि सैयदना हज़रत यूनुस अला नबीयना व अलैहिस्सलातो वस्सलाम ने अपनी कौम से अज़ाब का वादा किया था। उसमें ताखीर हुई तो आप उन से छिपकर निकल गये और आपने दरयाई सफ़र का कसद फरमाया कश्ती पर सवार हुये दरिया के दरमियान में कश्ती ठहर गई। और उसके ठहरने का कोई सबब मौजूद ना था। मल्लाहों ने कहा कि इस कश्ती में अपने मौला से भागा हुआ कोई गुलाम है। कुरआ डालने से ज़ाहिर हो जायेगा।

कुरआ डाला गया तो आपका नाम निकला तो आपने फरमाया कि मैं ही वह गुलाम हूँ तो आपको पानी में डाल दिया गया। क्योंकि उस वक्त का दस्तूर यही था कि जब तक भागा हुआ गुलाम दरिया में गर्क ना कर दिया जाये उस वक्त तक कश्ती ना चलती थी बहुक्मे इलाही मछली ने आपको निगल लिया। आप मछली के पेट में एक दिन या तीन दिन या सात दिन या चालिस दिन रहे।

आपने ज़िक्र इलाही की कसरत की और मछली के पेट में ला इलाहा इल्ला अन्ता सुब्हानक इन्नी कुन्तो मिनज़्ज़ालिमीन पढ़ना शुरू कर दिया तो अल्लाह जल्ल शानुहू ने मछली को हुक्म दिया तो उसने सैयदना हज़रत यूनुस अलैहिस्सलातो वस्सलाम को दरिया के किनारे डाल दिया। अल्लाह तआला फरमाता है।

ज़ुन्नून को याद करो जब चला गुस्सा में भरा तो गुमान किया कि हम उसपर तंगी ना करेंगे तो अंधेरियों में पुकारा। कोई माबूद नहीं सिवा तेरे पाकी है तुझको बेशक मुझसे बेजा हुआ। तो हमने उसकी पुकार सुन ली। और निजात बख्शी और ऐसी ही नजात देंगे मुसलमानों को।

मछली के पेट में रहने के बाइस आप ऐसे जईफ और नाज़ुक हो गये थे कि जैसे पैदाईश के वक्त होता है। जिस्म की खाल नर्म हो गई थी बदन पर कोई बाल बाकी ना रह गया था तो अल्लाह तआला ने कद्दू का दरख्त उगा दिया। जो आप पर साया करता था और मक्खियों से महफूज़ रखता था। और बहुक्मे इलाही रोज़ाना एक बकरी आती और अपना थन हज़रत के मुंह मुबारक में देकर आपको सुब्ह व शाम दूध पिला जाती। यहां तक कि जिस्म मुबारक की जिल्द शरीफ यानि खाल मज़बूत हो गई और अपने मौका से बाल जमे और जिस्म मुबारक में ताकत आई। अल्लाह तआला इरशाद फरमाता है।

यानि हमने उसपर कद्दू का दरख्त उगा दिया। और यह कद्दू का दरख्त आप पर जीलकदा की सतरहवीं तारीख को उगाया गया था।

जीलकादा के रोज़े : हदीस शरीफ में है कि जो शख्स जीलकादा के महीना में एक दिन रोज़ा रखता है तो अल्लाह करीम उसके वास्ते हर साअत में हज मकबूल और एक गुलाम आज़ाद करने का सवाब लिखने का हुक्म देता है।

और एक हदीस मुबारक में है कि महीना के अन्दर एक साअत की एबादत हज़ारों साल की एबादत से बेहतर है। और फरमाया कि इस महीना में पीर के दिन रोज़ा रखना हज़ार बरस की एबादत से बेहतर है।