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MASLAK e ALA HAZRAT ZINDABAD

तीसरा महीना — रबीउल अव्वल

तीसरा इस्लामी महीना रबीउल अव्वल मुबारक है इस की वजह तसमीया यह है कि जब इबतेदा में इसका नाम रखा गया तो इस वक्त मौसम रबी की इबतेदा थी यह महीना खैरात व बरकात और दुआओं का मनबअ है क्योंकि इस महीना की बारहवीं तारीख को अल्लाह जल्ल शानुहू ने अपने फज्ल व करम से रहमतुल्लिल आलमीन अहमद मुजतबा मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहो तआला अलैहि व बारिक व सल्लम को पैदा फरमाकर अपनी नेमतों की बारिश बरसाई। इसी माह की आठवीं तारीख को सय्यद दो आलम सल्लल्लाहो तआला अलैहि वसल्लम मदीना तशरीफ लाये और इसी माह की दसवीं तारीख को महबूब किबरिया सल्लल्लाहो तआला अलैहि वसल्लम ने उम्मुल मोमिनीन सय्यद हज़रत ख़दीजतुल कुबरा रज़ी अल्लाह तआला अन्हुमा से निकाह फरमाया था।

मशायख अज़ाम और उलेमाये केराम फरमाते हैं कि हुज़ूर पुरनूर शाफे यौमुनशुर सल्लल्लाहो तआला अलैहि व बारिक व सल्लम का वक्त विलादत बा सआदत लैलतुलकद्र से भी अफज़ल है। क्योंकि लैलतुलकद्र में फरिश्ते नाज़िल होते हैं। और विलादत पाक के वक्त खुद रहमतुल आलमीन शफीउलमुज़नबीन सल्लल्लाहो अलैहि व बारिक व सल्लम तशरीफ लाये। जिन के वास्ते तमाम जहान पैदा हुआ। नीज़ अल्लाह करीम लैलतुलकद्र में सिर्फ उम्मते मुसलमां पर फज्ल व करम फरमाते है। जैसा कि इरशाद बारी तआला है ( )

बारहवीं रबीउल अव्वल मुबारक को यानि विलादत पाक के दिन ख़ुशी व मुसर्रत का इज़हार करना। मसाकीन को खाना खिलाना, और मीलाद शरीफ का जुलूस निकालना। और जलसे मुनअकिद करना। और कसरत से दरूद शरीफ पढ़ना बड़ा सवाब है, अल्लाह तआला तमाम साल को अमन व अमान मरहमत फरमायेगा और उसके तमाम जायज़ मकासिद पूरे फरमायेगा।

मुसलमानों को चाहिये कि इस महीना मुबारक में बारहवीं तारीख को बिलखुसूस और बाकी साल बिलउमूम मीलाद शरीफ के मजालिस मुनअकिद करें। यह महफिल पाक ज़रिया हिदायत और हुसूल बरकात होगी।

हिकायत : हज़रत अब्दुल वाहिद इस्माईल रहमतुल्लाह तआला अलैहि बयान फरमाते हैं कि एक शख्स मिस्र में महफिल मीलाद मुनअकिद किया करता था और इस के पड़ोस में एक यहूदी रहता था, उसकी बीवी ने कहा कि हमारे पड़ोस में मुसलमान की क्या हालत है जो रबीउल अव्वल में बहुत माल खर्च करता है? उसके खानदान ने उसे बताया कि उसके नवी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) इसी महीना में पैदा हुये हैं, लिहाज़ा वह इसकी ख़ुशी में और अपने नबी की विलादत की तकरीम के वास्ते यह एहतेमाम करता है। उसकी बीवी ने कहा कि मुसलमानों में यह एक बहुत अच्छा तरीका है। यह कहकर वह औरत सो गई तो उसने ख़्वाब में एक खूबसूरत शख्सियत को देखा जिनके चेहरे से हैबत व जलाल और अनवार नुमायां हैं और वह उनके पड़ोसी मुसलमान के घर तशरीफ ले गये हैं। और उनके इर्द गिर्द उनके सहाबा की एक जमाअत है जो उनकी ताज़ीम व तकरीम करते हैं। औरत ने एक शख्स से दरयाफ्त किया यह कौन बुजुर्ग हैं?

उसने कहा कि यह अल्लाह तबारक तआला के रसूल अहमद मुजतबा मोहम्मद सल्लल्लाहो तआला अलैहि वसल्लम हैं। जो इस घर में तशरीफ लाते हैं। ताकि मीलाद शरीफ की ख़ुशी मनाते हैं।

उस औरत ने कहा अगर मैं आपसे कुछ कलाम करूं तो क्या मुझसे कलाम फरमायेंगे। उसने कहा हां ज़रूर! पस औरत ने आपके पास हाज़िर होकर अर्ज़ की या मोहम्मद सल्लल्लाहो तआला अलैहि व बारिक व सल्लम आपने लब्बैक फरमाया, औरत ने कहा कि आप मुझ जैसी को जवाब से नवाज़ते हैं। हालांकि मैं आप के दीन पर नहीं हूँ। बल्कि मैं आप के दुशमनों यानि यहूदियों से हूँ आपने फरमाया कसम है उस जात की जिसने मुझे सच्चा नबी बनाकर भेजा है मैंने तेरी आवाज़ पर जवाब ना दिया, यहां तक कि मैंने जान लिया कि अल्लाह तआला ने तुझको हिदायत नसीब फरमा दी है।

औरत ने कहा कि बेशक आप सच्चे नबी हैं और साहबे खुल्क अज़ीम हैं जिसने आप की मुखालफत की और आपकी कद्र ना पहचानी वह हलाक और जलील हुआ। मैं शहादत देती हूँ कि मोहम्मद सल्लल्लाहो तआला अलैहि व बारिक व सल्लम के रसूल हैं यह कहकर वह औरत अपने दिल में यह बैत कर ली कि जब सुबह होगी, तो वह तमाम चीज़ें जो मेरी मिल्कियत में हैं सदका व खैरात कर दूंगी। और अल्लाह तआला के रसूल का मीलाद शरीफ करूंगी, क्योंकि अल्लाह तआला ने उनकी बरकत से मुझे इस्लाम की नेमत अता फरमाई।

जब सुबह हुई तो उसने अपने ख़ाविन्द को देखा कि उसने खाने का एहतेमाम किया हुआ है। और बड़ी मसरूफियत में है। औरत हैरान रह गई और कहा कि मैं तुमको आली हिम्मत देख रही हूँ।

ख़ाविन्द ने कहा यह सब कुछ इस लिये है कि तूने रात को इस्लाम क़ुबूल किया है, औरत ने कहा, तुम्हें इसकी किस तरह खबर हो गई।

ख़ाविन्द ने कहा मैं भी तेरे बाद हुज़ूर अक़दस सल्लल्लाहो तआला अलैहि वसल्लम के दस्ते अक़दस पर मुशर्रफ बा इस्लाम हो गया था। अल्लाह तआला उनकी रहमतें नाज़िल फरमाये और उनका शरफ व करामत और ज़्यादा करे जिस तरह आपने हमें अल्लाह जल्ल शानुहू की मआरफत से आगाह किया और इसकी तरफ बुलाया। जो रोज़े महशर हमारी शफाअत फरमायेंगे। सल्लल्लाहो तआला अलैहि व बारिक व सल्लम।

हिकायत : अबु लहब जो मशहूर काफिर था। और सय्यद दो आलम सल्लल्लाहो तआला व बारिक व सल्लम के रिश्ता में चचा था। जब रहमतुल आलमीन सल्लल्लाहो तआला व बारिक व सल्लम की विलादत मुबारक हुई तो अबु लहब की लौंडी सुवैबिया ने आप की विलादत बासआदत की खुश खबरी अपने मालिक अबु लहब को सुनाई तो अबु लहब ने हुज़ूर अक़दस सल्लल्लाहो तआला अलैहि व बारिक व सल्लम की विलादत की ख़ुशी में अपनी लौंडी को आज़ाद कर दिया।

जब अबु लहब मर गया तो किसी ने ख़्वाब में देखा और हाल दरयाफ्त किया तो उसने कहा कि कुफ्र की वजह से दोज़ख के अज़ाब में गिरफ्तार हूँ मगर इतनी बात है कि हर पीर (सोमवार) की रात अज़ाब में तखफीफ (कमी) हो जाती है, और जिन उंगलियों से मैंने इशारा करके अपनी लौंडी को आज़ाद किया था, उनके दरमियान पानी आता है जिसे मैं चूसता हूँ।

इब्ने जौज़ी रहमतुल्लाह तआला अलैहि फरमाते हैं कि जब अबु लहव काफिर जिसकी मजम्मत में सूरह लहब नाज़िल हुई हैं तबाह हो जायें अबु लहब के दोनों हाथ और तबाह हो ही गया उसे कुछ काम ना आया उसका माल और ना जो कमाया अब धंसता है लपट मारती आग में।

यह इनाम मिला। तो बताओ उस मुसलमान को क्या सिला मिलेगा जो अपने रसूल करीम सल्लल्लाहो तआला अलैहि व बारिक व सल्लम की विलादत की ख़ुशी मनाये। उसकी जज़ा अल्लाह करीम से यही होगी कि अल्लाह तआला अपने फज्ले अमीम से उसे जन्नतुन्नईम में दाखिल फरमायेगा। अलहम्दो लिल्लाहि रब्बिल आलमीन।

हज़रात मीलाद पाक करना और उससे मोहब्बत करना ईमान की अलामत है और मीलाद पाक का सुबूत कुरआन मजीद हदीस शरीफ और अकवाल बुजुर्गों से है मीलाद शरीफ में हजारों बरकतें हैं। इसको बिदअत कहना दीन से * ना वाकफियत पर मबनी है।

महफिले मीलाद शरीफ की हकीकत

सबसे पहले आपको जानना चाहिये कि मीलाद की हकीकत क्या है मीलाद, मौलूद, मौलिद, यह तीनों लफ्ज़ मुत्तकारीब अलमाना हैं, मीलाद की हकीकत सिर्फ यह है कि मुसलमान एक जगह जमा हों। और एक आलिमे दीन उसके सामने हुज़ूर सरापा अनवर शाफये यौमुनशुर सल्लल्लाहो तआला अलैहि व बारिक व सल्लम की विलादत मुबारक और आप के मोजज़ात और आपके अख़लाक़ करीमा सही रवायत के साथ बयान करे। और आखिर में बारगाहे रिसालत में दरूद व सलाम बा अदब खड़े होकर पेश करें। अगर तौफीक हो तो शीरीनी पर फातिहा दिलाकर फुक़रा व मसाकीन को खिलायें। अहबाब में तकसीम करें फिर दुआ मांगकर अपने अपने घरों को चले जायें। यह तमाम उमूर जो ज़िक्र किये गये हैं कुरआन व सुन्नत और उलेमाए उम्मत के अकवाल से साबित हैं सिर्फ अल्लाह जल्ल शानुहू की हिदायत की ज़रूरत है।

मीलाद सुन्नत एलाहिया है।

महबूब किबरिया सल्लल्लाहो तआला व बारिक व सल्लम का मीलाद शरीफ खुद खालिक अकबर जल्ल शानुहू ने बयान किया है जैसा कि इरशाद बारी तआला है। बेशक तुम्हारे पास तशरीफ लाये तुम में से वह रसूल जिनपर तुम्हारा मशक्कत में पड़ना गरां है तुम्हारी भलाई के बहुत चाहने वाले हैं और मुसलमानों पर करम करने वाले हैं और मुसलमानों पर करम करने वाले मेहरबान हैं।

इस आयत शरीफ में पहले अल्लाह जल्ल शानुहू ने फरमाया लकद जाअकुम रसूल। मुसलमानों तुम्हारे पास अज़मत वाले रसूल तशरीफ लाये, यहां अपने हबीब पाक साहब लोलाक सल्लल्लाहो तआला व बारिक व सल्लम की विलादत शरीफ बयान फरमाई। फिर फरमाया कि वह रसूल तुममें से हैं, इसमें अपने रसूल मकबूल सल्लल्लाहो तआला व बारिक व सल्लम का नस्ब शरीफ बयान फरमाया है। फिर फरमाया हमारी भलाई के बहुत चाहने वाले और मुसलमानों पर करम फरमाने वाले मेहरबान हैं। यहां महबूब पाक सल्लल्लाहो तआला व बारिक व सल्लम की नेमत बयान फरमाई है और मीलाद मुबारक मुरव्वजा में यही तीन बातें बयान की जाती हैं। पस साबित हुआ कि सरकार अबद करार शाफए यौम शुमार सल्लल्लाहो तआला व बारिक व सल्लम का मीलाद शरीफ बयान करना सुन्नत एलाहिया है। बेशक अल्लाह तआला ने मुसलमानों पर एहसान फरमाया कि उनमें अपना रसूल भेज दिया। गौर करो कि अल्लाह जल्ल शानुहू ने अपने हबीब लबीब सल्लल्लाहो तआला व बारिक व सल्लम की आमद का ज़िक्र किस शान से किया और उसी का नाम मीलाद है।

मजालिस खैर करना बाइस सवाब

मीलाद शरीफ यानि हुज़ूर अक़दस सल्लल्लाहो वसल्लम की विलादत का बयान जायज़ है इसके ज़िमन में उस मजलिस पाक में हुज़ूर अक़दस सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम के फज़ायल व मोजज़ात व सेयर व हालात हयात व रज़ाआत व बेसत के वाकेयात भी बयान होती हैं, उन चीज़ों का ज़िक्र अहादीस में है और कुरआन मजीद में भी अगर मुसलमान अपनी महफिल में बयान करें बल्कि खास उन बातों के बयान करने के लिये महफिल मुनअकिद करें तो यह भी जायज़ है। (बहारे शरीअत जि.16 स.246)

मीलाद के वक्त क़ियाम करना

उर्फे आम में क़ियाम के मानी खड़े होकर रहमतुल्लिल आलमीन सल्लल्लाहो तआला व बारिक व सल्लम पर दरूद सलाम भेजना है इसमें इमामुल अंबिया वलमुरसलीन हज़रत अहमद मुजतबा मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम की ताज़ीम है जो बन्दाए मोमिन का शेआर है।

हज़रत हाजी इमदादुल्लाह मुहाजिर मक्की का कौले फैसल

मशरब फकीर यह है कि महफिले मिलाद में शरीक होता हूँ, बल्कि ज़रिया बरकात समझ कर मुनअकिद करता हूँ। और क़ियाम में लुत्फ व लज़्ज़त पाता हूँ। ( )

फकीर कादरी ने हस्बे ज़रूरत और हस्बे ताकत मीलाद शरीफ के मसला पर कदरे रौशनी डाली है। अल्लाह तआला क़ुबूल फरमाये और इससे आम मुसलमानों को नफा दे आमीन।

विलादत रसूल सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम की एक झलक

महबूब रब्बुल आलमीन शफीउल मुज़नबीन सल्लल्लाहो तआला व बारिक व सल्लम की आमद से कबल, अहले मक्का सख्त कहत साली में मुबतला थे और बड़ी तंगी में गिरफ्तार थे। जब सय्यदुल आलमीन सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम अपनी वालदा माजदा हज़रत आमना रज़ी अल्लाहो तआला अन्हा के शिकम अक़दस में तशरीफ लाये तो इतनी बारिश हुई कि ज़मीन सर सब्ज़ व शादाब हो गई दरख्तों पर पत्ते और फल व फूल लग गये और हर जगह फराखी व कुशादगी की फिज़ा कायम हो गई। तो अहले अरब ने इस साल का नाम सुन्नतुल फतह बलबहेताज रखा।

हज़रत आमना खातून रज़ी अल्लाह तआला अन्हा फरमाती हैं कि जब मैं हामला हुई तो एक जमाअत मेरे पास फरिश्तों की आई और कहा ऐ आमना! तू उस उम्मत के सरदार से हामला हो चुकी है।

फरमाती हैं कि मुझे अपने हामला होने की खबर तक ना हुई ना ही किसी किस्म की गरानी महसूस हुई जैसा कि आम औरतों को बोझ महसूस होता है सिर्फ इतनी बात थी कि मुझसे हैज़ मुनकता हो चुका था।

सरकार मदीना सल्लल्लाहो तआला व बारिक व सल्लम फरमाते हैं कि मेरी अम्मां जान ने ख़्वाब में देखा कि जो कुछ मेरे शिकम अक़दस में है वह नूर है और नूर के पेट में आने से बोझ का सवाल ही नहीं होता। रहमतुल आलमीन सल्लल्लाहो तआला व बारिक व सल्लम अपनी वालदा माजदा के शिकम अक़दस में पूरे नौ माह रहे, उस दौरान आप की वालदा माजदा को किसी किस्म का दर्द और दीगर शिकायत महसूस ना हुई। जैसा कि आम औरतों को हालते हमल में ऐसी शिकायतों का सामना करना पड़ता है।